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political review

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shailandraa singh


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घुम्मकड़ की नज़र

Posted On: 15 Sep, 2011  
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में

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पहचान कौन ?

Posted On: 15 Sep, 2011  
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मेट्रो लाइफ में

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समरथ को नहीं कोई दोष गुसाई

Posted On: 12 Sep, 2011  
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भारतीय कानूनों से ऊपर है बैंक ?

Posted On: 12 Sep, 2011  
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न्यूज़ बर्थ में

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तुलसी दास एक युग कवी!

Posted On: 14 Jul, 2011  
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Others में

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“स्वामी निगमानंद “

Posted On: 14 Jun, 2011  
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न्यूज़ बर्थ में

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बिडम्बना काश कोई सच दिखाता?

Posted On: 13 Jun, 2011  
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न्यूज़ बर्थ में

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इन्तजार-ए-सुबह…. ?

Posted On: 11 Jun, 2011  
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न्यूज़ बर्थ में

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राम-राम बाबा ?

Posted On: 8 Jun, 2011  
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न्यूज़ बर्थ में

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अभी कहानी ख़तम नहीं मेरे दोस्त…….

Posted On: 7 Jun, 2011  
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न्यूज़ बर्थ में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

निशा जी सदर अभिवादन आपके द्वारा लिखी लाइने की "देश हित में उठाई गया मुद्दा है बेचैनी क्यों". में एक साधारण सा आदमी हूँ पर खबरों पर मेरी नज़र रहती है और उसका ही आंकलन किया जाता है तटस्थ रह कर कोंग्रेस और भाजापा के नज़रिए से देखने की परम्परा छोड़ दी है अन्ना और रामदेव दोनों की नियत साफ़ है यह समाचार बता रहे है पर दोनों की कार्य शेल्ली अलग अलग यह कल समाचार बता रहे है. माना की देश में बेचेनी हो सकती है पर है तो जायज क्यों जिस तरह से राजनेतिक लोग रंग बदलते है उसी तरह से सामजिक संगठन रंग बदल लेते है तो बेचैनी होना स्वाभाविक है मेने १९७७ का दौर भी देखा था और १९८० का भी देखा जब उसके बाद भी देखा. जब निहित स्वार्थी लोग एक मंच पर आ जाते है तो परिवर्तन होता है पर वह होता है क्षणिक और कुछ ही समय में मोह भंग हो जाता है रामदेव से शिकायत नहीं है क्यों मानव प्रकृति ही ऐसी है मांगे मोर की तरह से है तो गलत कहाँ है रामदेव पर उनके साथ लगे लोग स्वार्थी है जो किसी भी मसले पर एक राय नहीं हो सकते क्या आप रामदेव के इस वियान से सहमत हो सकती सेना बनाई जाए जिसमे ११००० लोग शस्त्र से लेस किये जाए ? नहीं ना देश बहुत समय से नक्शल समिस्या से ग्रस्त है खालीस्थान का प्रकोप भी देश ने झेला है बोडो लैंड और गोरखा लैंड की अपनी अपनी अलग कहानी है कश्मीर की समिस्या में कुछ अदद ही हथियार बंद है जो पुरे हिंदुस्तान को तबाह किये है देश का दुर्भाग्य है की जो मसले रामदेव उठा रहे है उनको भाजापा को संसद में उठाना चाहिए था और उनपर वहास करके कानून बनबाना चाहिए था मात्र स्टंट खड़ा करके जनता को बरगलाया जा सकता है समाधान नहीं निकला जा सकता. बरगलाने का हश्र १९७७-१९८० ,१९८९,1996-२००३ के बर्ष रहे है जो काम होने चाहिए थे नहीं हुए हम सोच को बीच का रास्ता देते है न की पार्टी के हिसाब से फिर भी यदि आपको लगे की में गलत हूँ तो माफी मांगने me भी शर्म नहीं है आपके दो शब्द हिम्मत दे गए आगे भी ......... shailandra1959@gmail.com

के द्वारा: shailandraa singh shailandraa singh

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शैलेन्द्र जी चिंता न करो मुंशी इतवारी लाल भी तैयार है जंतर मंतर पर जाने के लिए “महाराष्ट्र के एक अंजाने सेस्थान राले गावँ सिद्धी जो कि अहमद नगर जिले, मे स्थित है वहाँ के एक रिटायर्ड फौज़ी ने भ्रष्टाचार के विरुध जन्तर मन्तर पर आमरण अनशन करके 4 दिन मे ही प्रसिद्धी प्राप्त करने के साथ्-साथ 87 लाख रुपये भी कमा लिये थे और सरकारी दामाद की तरह सरकार की नाक मे नकेल भी डाल रहे है, लोकपाल कानून रुप मे । और सुनो एक है बाबा राम देव जो कभी राम सेवक के नाम से हरियाणा मेँ गायेँ चराया करते थे फिर योग सिखाने लगे आजकल आयुर्वैदिक दवाओँ के व्यापार के साथ भ्रष्टाचार के विरुध बिगुल बजा रहे है, इन लगोटी धारी बाबा का हजारोँ करोड रुपयोँ का बहुत् बडा साम्राज्य है और हद यहीँ नही रुकी है खुद विदेशो मे जमीन के अतिरिक्त एक टापू भी खरीदा है और बात करते है विदेशो मे भारतियोँ के जमा काले धन को वापस लाने की ?” मुन्शी जी बोले —-“ देखो भाई अब तो यह कदम आगे बढ ही गये है और पीछे हटने का कोई सवाल ही नही है, बस अब तुम्हारा काम केवल ऐलान करने का ही है कह दो जन्तर मन्तर खाली करो अब मुन्शी ईतवारी लाल आ रहा है” अच्छे लेख के लिए बधाई 627

के द्वारा:

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

जनता करे भी तो क्या करे उससे तो ये देखना है किस चोर को चुने..... तमिलनाडु का हाल सभी जानते है वहा कलर टीवी , लेपटोप और कैश चलता है ! ये वही जयललिता है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने कभी हटा दिया था| दोनों ही पार्टी महाचोर है इसमें कोई शक नहीं | रही बात पश्चिम बंगाल की तो ये वही ममता है जो दो साल तक सरकार में रेल मंत्री रही और रेल मंत्रालय का बेडा गर्क कर दिया.... मैडम के नजरे तो राज्य चुनावो पर थी और रेलवे के अफसर फायेल्स लेकर पश्चिम बंगाल भागते थे ........अगर उन्हें अपनी जीत इतनी ही पक्की लग रही थी तो क्यों सरकारी खजाने का इतना दुरूपयोग किया गया |जनता को अब बस ये देखना होता है वो सांपनाथ को चुने या नागनाथ को

के द्वारा:

पाण्डेय जी सप्रेम अभिवादन, आपने अपने व्यस्त पालो से कुछ समय दिया उसके लिए शुक्रिया आपने सही कहा कि देश में इतने भगवान् होते हुए भी जनता कही नज़र नहीं आती सही है पर उनको भगवान् बनाने वाले भी तो हम ही आप है यह बात अलग है कि बाजार की भांति जरुरत मंद हर मद से महरूम रह जाता है और बड़ा आदमी उसके हिस्से की चीज़ उठा ले जाता है वही भगवान् के साथ भी हो रहा है आम आदमी उनके दर्शन की लाइन में है और पूंजी पति उड़न खटोले से जाकर वी आई पी द्वार से दर्शन कर जाता है बड़ी कोफ़्त होती है कि जब एक आम आदमी से शुल्क लिया जाता है और बी आई पी उससे भी कही मोटी रकम दे कर जल्द दर्शन कर जाता है यहाँ समाज्बाद नहीं है ना होगा तो फल भी उसी के हिसाब से मिलेगा. फिर भी साधुबाद के लिए धन्यबाद ?

के द्वारा: shailandraa singh shailandraa singh

नमस्कार शैलेन्द्र जी ,मैंने आपकी रचना पहली बार पढ़ी .आज हमारा देश बाहरी और आंतरिक समस्याओ से घिरा हैं और हमारे नेता मौज उड़ाने में लगे हैं.शहीदी दिवस पर हुई घटनाओ के बारे में जो आपने बताया वह वास्तव में दुर्भाग्य पूर्ण हैं. सत्ता और विपक्ष दोनों जनता के साथ मजाक कर रहे हैं. लोक सभा और विधानसभाओ में अच्छे नेताओ की घोर अभाव हो गई हैं. आज हमारे देश में "कानून तोड़ने वाले कानून बनाने वाले बने हैं. "अगर हम दलीय व्यवस्था की बात करे तो मुझे लगता हैं की आज भारत में दल -दलीय व्यवस्था हैं. जिसे मन करता हैं वह अपना दल बना लेता हैं. क्षेत्रीय दलों की बाद सी आ गई हैं. क्षेत्रीय दल विधानसभाओ तक तो ठीक हैं परन्तु जब यह लोकसभा तक अपनी ताकत पहुचाते हैं तब वे अपनी "स्वार्थ की राजनीति" करते हैं. समस्याओ का जड़ "गठबंधन की राजनीति "भी हैं मैंने कुछ लेख लिखे हैं यदि आपको कभी फुर्सत मिले तो पढ़कर अपने विचारो से मुझे अवगत करावे. आपके शिकायतों को मैं अपनी आलोचना नहीं कृत्घ्ता समझूंगा . www.amitkrgupta.jagranjunction.com.

के द्वारा:

प्रिय वरुण जी, आपके विचार जान कर काफी अच्छा लगा, मेरे एक दोस्त है श्याम मोहन गुप्ता उनका विचार जान ले तो काफी मदद गार साबित हो सकता है उनका कहना है की पैसा किसी भी तरह से कमाया जाए और लोग कमा रहे है पर उसका निवेश कहाँ हो रहा है यह जान लेना जरुरी है पेशे से वह एक प्रिंसिपल है मिडिल स्कूल में वह कहते है की इस देश में दो करोड़ अमीर है यदि इनसे कुछ हिस्सा ले लिया जाए तो बुरा नहीं है और उस पैसे को गरीव लोगो के हित में लगा दिया जाये तो क्या बुरा है ? वही हाल रामदेव जी का है में उनकी इज्जत इसलिए नहीं करता है की वह एक योगी के रूप में पूंजीपति है में उनकी इज्जत इसलिए करता हूँ की समय पर मदद में हाथ उठाने में हिचक नहीं है याद करिए कोशी का प्रकोप और मदद में दिए गए वोलिन्तिएर और सामान. कुछ लोगो का तो भला हुआ होगा? कुछ पंक्तिया है "साधू ऐसा चाहिए जैसे सूप सुभाय सार सार को गह रहे थोथा देय उडाय" हमारी कोशिस हो की जो सर्वजन सुखाय और बहु जन हिताय की नीत तो जो पैसा रामदेव कमा रहा है वह उसकी अपनी कमाई है पर खर्चा कहाँ कर रहा है उसपर नज़र होनी चाहिए? कोई गलत अमल नहीं है देश सेवा करना तो किसी माध्यम से करे उनका अपना नज़रिया है रही बात राज नीत की में भी विरोधी हूँ पर किसी को आगे आना ही होगा बरना कुछ होने वाला नहीं ? राय के लिए शुक्रिया.

के द्वारा:

बाबा रामदेव ने एक और बात कही है। कालेधन के सच को बाहर लाने उन्होंने कुछ प्रमुख राजनेताओं एवं मंत्रियों का नारको टेस्ट कराने का सुझाव दिया है। इस सुझाव को भाजपा ने हाथोंहाथ लपकते हुए प्रधानमन्त्री एवं मुख्यमंत्रियों को भी नारको टेस्ट के दायरे में रखे जाने की वकालत की है। भाजपा का यह सुझाव सस्ती राजनीति से प्रेरित है और बचकाना भी है। प्रधानमन्त्री जैसे उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे हुए व्यक्तियों के लिए नारको टेस्ट की वकालत करना उनका ही नहीं, देश का अपमान करना है। अगर अविश्वास की खाई इतनी गहरी है तो देश के जनता यकीन किस पर करें?यदि देश में लोकतान्त्रिक व्यवस्था जीवित हैं तो उसकी बडी वजह विश्वास और ईमानदारी है। कुछ बेईमान मिलकर पूरे देश को बेईमान नहीं ठहरा सकते। इसलिए केवल राजनेताओं को कोसना उचित नहीं है। बेहतर तो यही है, ऐसा कोई सुझाव देने के पूर्व बाबा रामदेव स्वयं को नारको टेस्ट के लिए पेश करते। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि उन्होंने योग को नया बाजार दिया जिसका विराट स्वरूप हरिद्वार में नजर आता है। यह बात भी सभी जानते हैं कि स्वयं को अतिसाधारण एवं जनसेवक बताने वाले बाबा के अधिकांश कार्यक्रम पूंजीपतियों द्वारा प्रायोजित रहते है।

के द्वारा:




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